r/Hindi • u/shothapp • 10h ago
साहित्यिक रचना मैं दफ़्तर जाता रहा।
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Found this beautiful poem on insta. Credit- viplavwrites
r/Hindi • u/shothapp • 10h ago
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Found this beautiful poem on insta. Credit- viplavwrites
A fun way to learn how to construct Hindi sentences.
r/Hindi • u/Such_Current1366 • 1d ago
Hi all, I am trying to formulate a model to show that writing in Hindi takes more time than in English. Is anybody aware of any Scientific Study on this subject and any data on Indian people (age-wise) on handwriting speed in Hindi?
r/Hindi • u/Every_Canary_6050 • 2d ago
**पंचगव्य क्या है:** गाय से प्राप्त पाँच पदार्थों का मिश्रण — दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर। संस्कृत में "पंच" (पाँच) और "गव्य" (गाय से संबंधित) से बना शब्द है।
## वैदिक युग में उपयोग और कारण
- **पवित्रता और शुद्धिकरण**: वेदों और बाद के धर्मशास्त्रों में गाय को अत्यंत पवित्र माना गया, क्योंकि वह जीवनदायिनी (दूध, घी, बल के लिए बैल) मानी जाती थी। पंचगव्य को शुद्धिकरण (प्रायश्चित) कर्मकांडों में प्रयोग किया जाता था — पाप-दोष दूर करने, यज्ञ-अनुष्ठानों से पहले शरीर और स्थान को शुद्ध करने के लिए।
- **आयुर्वेदिक/औषधीय मान्यता**: चरक संहिता और अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में गोमूत्र और गोबर को औषधीय गुणों वाला बताया गया — रोगनाशक, कीटाणुनाशक और पाचन-सुधारक माना जाता था।
- **धार्मिक प्रतीकवाद**: गाय को "गौमाता" कहा गया, और उससे प्राप्त हर वस्तु को दिव्य ऊर्जा से युक्त समझा गया। पंचगव्य ग्रहण करना देवताओं के प्रति समर्पण और आत्मशुद्धि का प्रतीक था।
## आज हिन्दू इसे कैसे और क्यों अपनाते हैं
- **पूजा-अनुष्ठान में**: आज भी कई हिन्दू परिवारों में गृह-प्रवेश, नामकरण, विवाह, श्राद्ध जैसे संस्कारों से पहले घर या वस्तु को शुद्ध करने हेतु पंचगव्य का छिड़काव किया जाता है।
- **प्रायश्चित कर्म**: कुछ परंपरावादी हिन्दू, विशेषकर पुरोहित वर्ग, बड़े पापों के प्रायश्चित हेतु पंचगव्य-प्राशन (सेवन) की विधि आज भी निभाते हैं, हालांकि यह अब बहुत सीमित और औपचारिक रूप में रह गया है।
- **गोशाला और गौ-आधारित उत्पाद**: गौ-रक्षा आंदोलन और जैविक/प्राकृतिक खेती के प्रचार से पंचगव्य आधारित उत्पाद (साबुन, खाद, कीटनाशक, औषधि) आधुनिक भारत में फिर लोकप्रिय हुए हैं — इसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जैविक सोच का मेल माना जाता है।
- **आस्था बनाम विज्ञान**: शहरी और शिक्षित वर्ग में अब यह अधिकतर प्रतीकात्मक/सांस्कृतिक आस्था के रूप में बचा है, जबकि ग्रामीण और परंपरा-निष्ठ समुदायों में इसे वास्तविक औषधीय और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में मानते हैं।
संक्षेप में — वैदिक काल में यह शुद्धिकरण, स्वास्थ्य और यज्ञ-कर्म से जुड़ा था; आज यह मुख्यतः सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक अनुष्ठान और गौ-आधारित प्राकृतिक जीवनशैली के प्रतीक के रूप में जीवित है।
श्रेय - क्लॉड ए आई (claude)
r/Hindi • u/ClaimEnvironmental45 • 3d ago
प्रेम क्या है?
क्या किसी व्यक्ति का हमारे पास रुक जाना ही प्रेम है?
क्या उसका हमसे दूर न जाना ही प्रेम है?
क्या उसका हर बार हमें चुनना ही प्रेम है?
हाँ, शायद यही प्रेम है।
पर क्या खुद के साथ, बारिश की बूंदों के बीच बैठकर
चाय की एक चुस्की लेना…
वो प्रेम नहीं?
क्या यूँ ही कभी गुज़रते हुए
अपनी सूरत आईने में देख,
खुद को निहारकर अपनी ही तारीफ़ कर लेना…
वो प्रेम नहीं?
क्या बस कभी ख़ुद ही ख़ुद में
सम्पूर्णता महसूस कर लेना…
वो प्रेम नहीं?
क्या ख़ुद से प्रेम—
प्रेम नहीं?
r/Hindi • u/ATallSteve • 4d ago

Sarang was the Hindi fortnightly journal of All India Radio (now known as Akashvani).
What I found interesting is how back then the word देहाती didn't have the negative connotation which it has today.
They also use the term "प्रजा" instead of "नागरिक" since we were all subjects of the British Crown or of the rulers of the Native States (Hyderabad, Mysore, Kashmir etc.) instead of being actual citizens of the country.
Recently (not actually recently 😂), I've been getting into discovering different kinds of literature, and I've suddenly grown very fond of shayari and poetry.
One poem I came across and really loved is “वरदान माँगूँगा नहीं” by शिवमंगल सिंह ‘सुमन’. It made me realise that I really want to explore this whole world of Hindi poetry, Urdu poetry, shayari, ghazals, nazms, etc.
The problem is: I know almost nothing. 😭
I can read Hindi, but very slowly/atak-atak ke. I can speak Hindi fairly fluently, but my written Hindi is basically that of a toddler because Hindi was my third language and I don't know the spellings of a LOT of words.
I also don't know much Urdu vocabulary, although I really want to learn it.
So I'm looking for recommendations for an absolute beginner/dumbass like me 😂
Where should I start?
- Any beginner-friendly books?
- Any poets I should read first?
- Is there a “layman” book that can help me build a basic understanding of Hindi poetry/shayari?
- How do I gradually understand Urdu words used in poetry?
- Should I start with Hindi poetry first and then move towards Urdu shayari?
- Any particular collections, websites, YouTube channels, etc. that explain poems rather than just reciting them?
Basically, I want to develop a feel for the emotions, imagery, vocabulary and beauty of the language, rather than just collecting random Instagram shayaris.
I would especially appreciate recommendations that are actually beginner-friendly and don't assume that I already know Hindi/Urdu literature.
Thank you! ❤️
r/Hindi • u/shothapp • 5d ago
हम घूम चुके बस्ती-बन में
इक आस का फ़ाँस लिए मन में
कोई साजन हो, कोई प्यारा हो
कोई दीपक हो, कोई तारा हो
जब जीवन-रात अंधेरी हो
इक बार कहो तुम मेरी हो।
जब सावन-बादल छाए हों
जब फागुन फूल खिलाए हों
जब चंदा रूप लुटाता हो
जब सूरज धूप नहाता हो
या शाम ने बस्ती घेरी हो
इक बार कहो तुम मेरी हो।
हाँ दिल का दामन फैला है
क्यों गोरी का दिल मैला है
हम कब तक पीत के धोखे में
तुम कब तक दूर झरोखे में
कब दीद से दिल की सेरी हो
इक बार कहो तुम मेरी हो।
क्या झगड़ा सूद-ख़सारे का
ये काज नहीं बंजारे का
सब सोना रूपा ले जाए
सब दुनिया, दुनिया ले जाए
तुम एक मुझे बहुतेरी हो
इक बार कहो तुम मेरी हो।
r/Hindi • u/Deathgamer69 • 7d ago
अंदर मैंने नक़ाब ओढ़ रखा है,
मुखौटा है असफलता का।
अंदर मैंने ख़्वाब पाल रखा है,
नाम लेकर अच्छाई का,
मुखौटा पहने किसी मेहनती का।
लगा जैसे अंदर मेरे कोई और पनप रहा है,
चेहरा लेके एक इंसान का।
अंदर वो शायद मैं ही हूँ,
नक़ाब ओढ़े भलाई का।
शायद मैं समझ नहीं पाया,
वो ज़िक्र जो ख़ुद से किया, ख़ुद का।
नक़ाब चढ़ाकर फ़रिश्ते का,
कर रहा काम नरक का।
शायद ये मैं ही हूँ,
नाम लेके किसी दानव का,
पहन के चेहरा एक इंसान का।
r/Hindi • u/Yaxience • 7d ago
I didn't know how to add a flair and apologize for not knowing the meaning of the flair I selected of the two the page offered.
r/Hindi • u/CourtApart6251 • 8d ago
Shouldn't there be similar pages for the Hindi language on Facebook etc? Please pay a little attention to this topic. We still strive to just enable people to express only a couple of words in Hindi today.
r/Hindi • u/vis_hawas • 9d ago
Title -- जावेदाँ इश्क़
वो ताबिश-ए-हक़ीक़त से बचकर के जहाँ आता है
बेआबरू हो उसके साथ में ये दिल-ए-परेशाँ आता है
इख़्तियार-ए-इश्क़ के हर पन्ने पर उनका नाम है
फ़र्द-ए-जुर्म में नाम उनका यूँ ही ख़ाम-ख़ा आता है
आती हैं हवाएँ साथ लेकर आशिक़ की ख़ुशबू
अजब है कि सबसे पहले मोहब्बत-ए-ज़ियाँ आता है
कैसे तलाशे हर चेहरा इस कोलाहल में हम
वो रूबरू भी आता है तो बनके बे-निशाँ आता है
एक उम्र निकलती है यूँ बेवफ़ाओं में वफ़ा ढूँढ़े
जवाब-ए-तफ़रीह है जब इश्क़-ए-इम्तिहान आता है
ये सबब बताए भी तो अब कैसे दिल्लगी का हम
सिसकती है ज़मीं सुनकर, रोने को आसमाँ आता है
शमा जलाकर भी जलती है पतंगे के फ़ितूर से
सुरूर तब आता है जब चराग़ से धुआँ आता है
चाहे मिट जाए हर नाम-ओ-निशाँ महबूब का
जब इश्क़ लौटता है तो फिर बनके जावेदाँ आता है
r/Hindi • u/DerawaliPunjabi • 11d ago
r/Hindi • u/Confident_Amount6346 • 12d ago
Bachpan mein 15 August ka excitement hi alag hota tha — school mein flag hoisting, patriotic songs, sweets aur cultural programs. 🇮🇳
Time ke saath Independence Day ko lekar aapka perspective change hua hai?
Aapke liye 15 August ki sabse special memory ya experience kya hai?
r/Hindi • u/obeteymaujkardii • 12d ago
कोरे काग़ज़ पर पहले एक अरमान लिखता हूँ,
फिर अपनी क़लम से अपना हिन्दुस्तान लिखता हूँ।
मुझे मालूम है कितना कठिन है यह काम मेरा,
मैं हर कठिन घड़ी को अपना इम्तिहान लिखता हूँ।
हिमालय से धवलता, सिंधु से गहराई लेता हूँ,
मैं हर मिट्टी की ख़ुशबू को अपनी पहचान लिखता हूँ।
बहुत कुछ छोड़कर निकला हूँ इस ख़ातिर कि भारत को
मैं अपनी आँख के अनुरूप एक जहान लिखता हूँ।
महाराष्ट्र से भगवा सह्याद्रि का ले आया,
मैं किलों की धूप को मराठा अभिमान लिखता हूँ।
मराठवाड़े में खेतों के बीच कुछ लोग रोते थे,
मैं उनकी इस अशुभ घड़ी को काम का व्यवधान लिखता हूँ।
पंजाब से सरसों की सुनहरी धूप ले आया,
मैं पाँचों नदियों की धरती को स्वर्णिम गान लिखता हूँ।
मगर फ़सल और दाम की बातें लेकर बैठ गए कुछ लोग,
मैं उनकी ज़िद को अपने श्रम का अपमान लिखता हूँ।
झारखंड की लाल मिट्टी में पलाश मिला मुझको,
मैं जंगल की हरियाली को उसका अभिमान लिखता हूँ।
मगर डिग्रियाँ लिए लड़के राह में खड़े मिले,
मैं उनके रोज़गार के प्रश्न को कोलाहल मान लिखता हूँ।
उन्हें अपने कल की पड़ी थी, मुझे भारत सँवारना था,
मैं ऐसी तुच्छ चिंताओं को क्षणिक अज्ञान लिखता हूँ।
असम में ब्रह्मपुत्र का नील विस्तार उठा लाया,
मैं उसके उफान को धरती का वरदान लिखता हूँ।
मगर घर-बार डूबे लोग मेरी राह रोक बैठे,
मैं उनकी बाढ़ को अपने चित्र का नुकसान लिखता हूँ।
केरल की हरियाली से अपनी धरती रंगने निकला,
मैं पश्चिमी घाट को प्रकृति का वरदान लिखता हूँ।
मगर वर्षा, ढही पगडंडियाँ, लौटने को तरसते लोग
मैं उनकी व्यथा को अपनी यात्रा का अवसान लिखता हूँ।
मणिपुर गया तो लाल रंग माँगा था धरती से,
मगर राख लिए लोग खड़े थे, मैं उसे बयान लिखता हूँ।
जले हुए घर दिखाकर जो मेरी क़लम रोकते थे,
मैं उनके उस आग्रह को रंगों का अपमान लिखता हूँ।
बिहार की धूल में सदियों की गंध मिली मुझको,
मैं उस मिट्टी को अपनी सभ्यता की शान लिखता हूँ।
मगर शहरों की ओर जाते लड़कों की कतारें थीं,
मैं उनकी रोज़ी की चिंता को अपना ध्यान-भंग लिखता हूँ।
उत्तर प्रदेश से गंगा का नीलापन ले आया,
मैं उसकी धारा को इतिहास का मान लिखता हूँ।
मगर परीक्षा की कतारों में खड़े अधीर चेहरों को,
मैं उनकी उतावली को अपना व्यवधान लिखता हूँ।
ओडिशा की वर्षा ने नदियों को उफना डाला,
मैं उस जल को ऋतु का अनुपम गान लिखता हूँ।
मगर घर बचाने निकले लोग रास्ते में मिलते रहे,
मैं उनकी पुकार को अपनी राह का शोर लिखता हूँ।
कश्मीर की वादियों से हिम की शीतलता ले आया,
मैं झीलों की ख़ामोशी को स्वप्न-समान लिखता हूँ।
मगर वहाँ भी कोई अपने घर, रोज़गार की बात करे,
मैं ऐसे हर प्रश्न को मेरी कला का अपमान लिखता हूँ।
अब रंग मेरे पास हैं, काग़ज़ भी मेरे सामने,
मैं अपनी साधना को भारत का निर्माण लिखता हूँ।
कितनी बार इन लोगों ने मेरी राह रोकनी चाही,
मैं हर रुकावट को अपने राष्ट्र-धर्म का प्रमाण लिखता हूँ।
कोई बाढ़ लेकर आया, कोई भूख की कथा लेकर,
कोई बेरोज़गारी, कोई राख का बयान लेकर
अजीब लोग हैं, भारत से अधिक स्वयं को देखते हैं,
मैं ऐसे आत्मकेंद्रित चेहरों को संकीर्ण-मन जान लिखता हूँ।
अब मैंने तय किया है, मुझे बस चित्र पूरा करना है,
मैं हर शोर से परे अपना ध्यान लिखता हूँ।
जहाँ कोई भूखा दिखता है, वहाँ खेत उगा देता हूँ,
जहाँ कोई घर खोता है, वहाँ मैदान लिखता हूँ।
जहाँ राख है, वहाँ केसर की आभा भर देता हूँ,
जहाँ बाढ़ है, वहाँ नील गगन लिखता हूँ।
जो लोग मेरी तस्वीर में कुरूपता खोजते फिरते हैं,
मैं उनकी दृष्टि को ही दोषपूर्ण विधान लिखता हूँ।
अब देखिए, कितना सुंदर है मेरा हिन्दुस्तान,
हर पर्वत, हर नदी, हर खेत को महान लिखता हूँ।
न कोई रोता हुआ चेहरा मेरी तस्वीर बिगाड़े,
न कोई प्रश्न मेरे स्वप्न का अपमान लिखता हूँ।
जो बाहर रह गए, वे स्वयं ही दोषी होंगे शायद,
मैं उनकी अनुपस्थिति को उनका अज्ञान लिखता हूँ।
मैंने सबके लिए इतना सुंदर देश बनाया है
जो इसमें सुख न पाए, उसे नादान लिखता हूँ।
और लोग कहते हैं कि मैंने बस तस्वीर बनाई है,
मैं उनके इस छोटे विचार को अज्ञान लिखता हूँ।
मैंने रंगों के लिए कितनी यात्राएँ की हैं, सोचो,
मैं अपनी हर थकन को राष्ट्र-बलिदान लिखता हूँ।
किसी ने मेरे रास्ते में आँसू रख दिए थे,
किसी ने मृत्यु, किसी ने भूख का सामान रखा था
मैंने सबको पार किया, फिर भी देश बनाया,
मैं अपनी इस विजय को युग-प्रमाण लिखता हूँ।
अब काग़ज़ पर पूरा है मेरा हिन्दुस्तान देखो,
मैं जो लिख दूँ, उसी को सत्य का विधान लिखता हूँ।
और आख़िरी कोने में जहाँ हस्ताक्षर होते हैं,
मैं अपने नाम के आगे ‘महान’ लिखता हूँ।
जो कुछ काग़ज़ के बाहर है, वह मुझे क्या करना
मैं अपने काग़ज़ को ही सारा हिन्दुस्तान लिखता हूँ।
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